जिला अस्पताल में चिकित्सक की लापरवाही से प्रसुता और उसके नवजात की मौत

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वरिष्ठ गायनिक के प्रसुता के पीलिया ग्रसित होने तथा बच्चा अटका होने पर रेफर किए जाने की दी थी एडवाईज मगर चिकित्सक डॉ अनुपमा ने नहीं किया रेफर

प्रसव के दौरान नवजात की हुई मौत, रात को मां भी चल बसी

अपनी गलती को छिपाने के लिए देर रात मृत प्रसुता को कर दिया सिरोही रेफर  

 

शिवगंज। चिकित्सा सेवाओं में सिरोही जिले के सबसे बहतरीन अस्पतालों में अपनी पहचान कायम करने वाले राजकीय जिला अस्पताल शिवगंज में एक चिकित्सक की ओर से जानबुझ कर की गई लापरवाही एक अनुसूचित जाति की प्रसुता और उसके नवजात के लिए काल बन गई। इतना ही नहीं वरिष्ठ चिकित्सक की ओर से प्रसुता के पीलिया ग्रसित होने तथा बच्चा अटका होने से उसे रेफर करने की एडवाईज दिए जाने के बावजूद उसे रेफर नहीं कर सामान्य प्रसव करवाए जाने से नवजात की कुछ ही देर में मौत हो गई। रात के समय दर्द से कराहती प्रसुता ने भी दम तोड़ दिया। इसमें दिल को झकझांैर देने वाली बात तो यह रही कि अपनी गलती को छिपाने के लिए चिकित्सक ने देर रात मृत प्रसुता को ही सिरोही रेफर कर अपने बचने के रास्ते को साफ करने का इंतजाम कर दिया।

गौरतलब है कि शिवगंज का जिला अस्पताल शिवगंज सहित आसपास के क्षेत्रों ही नहीं बल्कि पाली जिले के कई गांवों में प्रसव के लिए सबसे सुरक्षित अस्पताल माना जाता है। यहीं वजह है कि जब से यह जिला अस्पताल बना है तब से लेकर अब तक प्रसव के लिए बाहरी जिलों से यहां मरीज आने की संख्या बढी है। वर्तमान में इस अस्पताल में चार गायनिक चिकित्सक कार्यरत है। मामला १२ सितंबर २०२३ का है। पाली जिले का नोवी गांव निवासी पीताराम भील अपनी पत्नी श्रीमती अमरी देवी का प्रसव करवाने के लिए शिवगंज अस्पताल आया था। जानकारी मिली है कि यह प्रसुता चिकित्सक श्रीमती अनुपमा जाखलिया से उपचार ले रही थी। सुबह के समय वह अस्पताल आई उस समय वरिष्ठ सर्जन गायनिक मनीषा चौधरी डूयटी पर तैनात थी। उन्होंने जब मरीज की जांच की तो पाया कि प्रसुता पीलिया रोग से ग्रसित है तथा बच्चा भी अटका हुआ है। जिससे सामान्य प्रसव होना मुश्किल था। मरीज की हालत को देखते हुए डॉ चौधरी ने तत्काल ही उसे सिरोही रेफर करने के लिए एडवाईज जारी कर दी। इस बीच वहां पहुंची डॉ अनुपमा जाखलिया ने यह कहते हुए कि यह मरीज उनके उपचाराधीन है इसलिए उसे रेफर किया जाए या नहीं यह वह तय करेंगी। उन्होंने डॉ चौधरी को बताया कि उसका सामान्य प्रसव होगा। इसके बाद डॉ चौधरी वहां से चली गई।

 

प्रसव को बना दिया प्रतिष्ठा का प्रश्न

प्रसुता अमरी देवी की हालत गंभीर होने के बावजूद डॉ जाखलिया ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया और रिस्क होने के बावजूद उसका सामान्य प्रसव करवाने का निर्णय लिया। परिणाम स्वरूप शाम तक उसका प्रसव नहीं हुआ। इस दौरान प्रसुता के परिजनों ने बार बार चिकित्सक से इस बात का तकाजा किया कि क्या सामान्य प्रसव हो जाएगा। चिकित्सक भी उन्हें सामान्य प्रसव का ही कहती रही। बताया गया है कि इस दौरान कुछ नर्सिग कर्मियों ने भी डॉ के समक्ष उसे रेफर कर देने की बात कहीं मगर इस तरफ चिकित्सक ने कोई ध्यान नहीं दिया। आखिरकार चिकित्सक ने शाम करीब छह बजे प्रसुता का प्रसव करवाया लेकिन जटिल प्रसव होने की वजह से नवजात की प्रसव के दौरान ही मौत हो गई। मगर उसे जिंदा बताते हुए भगवान महावीर अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन परिजन जैसे ही उसे भगवान महावीर अस्पताल लेकर गए चिकित्सकों ने उसे मृत बताते हुए वापस भेज दिया।

 

पांच घंटे तक जिंदगी और मौत से जुझती रही प्रसुता

प्रसव करवाने के बाद डॉ जाखजिया नर्सिग कर्मियों को आवश्यक हिदायत देने के बाद वहां से चली गई। इस बीच प्रसुता की हालत बिगडने लगी। उसे जी घबराने की शिकायत होने पर उसका पति और उसका भाई गोपाल बार बार चिकित्सक को बुलाने और जांच करवाने का आग्रह करते रहे लेकिन डॉ जाखलिया उसकी जांच करने नहीं आई। इस बीच उसकी हालत काफी बिगड गई। तब नर्सिग कर्मियों ने एनेस्थेटिक डॉ पुष्पा मीना को ऑन कॉल अस्पताल बुलवाया। डॉ मीना कॉल मिलते ही तत्काल अस्पताल पहुंची और मरीज की जांच की तो उसके पल्स और बीपी नहीं थे। उन्होंने मरीज के बीपी पल्स लाने के लिए अपने हर संभव प्रयास किए। इस बीच डॉ जाखलिया भी अस्पताल पहुंची तब तक प्रसुता की मौत हो चुकी थी।

 

अपना बचाव करने के लिए मृत देह को कर दिया रेफर

जब चिकित्सक डॉ जाखलिया को इस बात की जानकारी मिली कि प्रसुता की मौत हो गई है। इसके बाद उन्होंने अपनी लापरवाही को छिपाने के लिए वे सभी भरसक प्रयास किए जो किए जा सकते थे। इसके लिए उन्होंने मृत प्रसुता को ही सिरोही रेफर कर दिया। इस दौरान प्रसुता के परिजनों को भी इस बात की भनक लग गई कि प्रसुता की मौत हो गई है। जैसे ही वे उसे बेस एम्बूलेंस में लेकर सिरोही के लिए रवाना हुए मृतका के भाई ने उसकी नब्ज और आंखें देखी तो उसे पता चल गया कि उसकी बहन मर चुकी है। जिस पर वह चालक को कह कर एम्बूलेंस को वापस अस्पताल लेकर आया और वहां हंगामा खडा कर दिया।

 

पुलिस पहुंची, समझा बुझाकर शांत किया मामला

इस बीच जानकारी मिलने पर अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ अखिलेश पुरोहित अस्पताल पहुंचे तथा पुलिस को इसकी जानकारी दी। बाद में परिजनों के आरोप के बाद पीएमओ ने शव को मोर्चरी में रखवाने का कह दिया। बाद में पुलिस की ओर से समझाईश करने के बाद परिजन शव को लेकर चले गए। बहरहाल, डॉ जाखलिया की लापरवाही और मरीज की जान जैसे मामले को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना दिए जाने की वजह से एक प्रसुता ओर उसके नवजात की मौत एक गंभीर प्रवृति का मामला है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

SL News Rajasthan

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